કલ્પવૃક્ષ

ૐ ભૂર્ભુવ:સ્વ: તત્સવિતુર્વરેણ્યં ભર્ગોદેવસ્ય ધીમહિ ધિયો યો ન: પ્રચોદયાત્ ||

हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं और बधाईयां

हनुमान जन्मोत्सव की अनंत शुभकामनाएं और बधाईयां

तुलसी दास जी ने हनुमान जी को विज्ञानी बताया है। उन्हें एक विज्ञानी के रूप में ही देखा और समझा जाना चाहिए। हनुमान जी अपनी हर एक सांस में प्रभु श्रीराम का नाम लेते हैं। यह कोई आसान बात नहीं है। इसके लिए योग की गहरी जानकारी होनी चाहिए। हम कह सकते हैं कि हनुमान जी को योग विज्ञान की अच्छी जानकारी थी। भजन एक विज्ञान है। हनुमान जी को भजन विज्ञान की भी जानकारी थी। हनुमान जी निरंतर अपने प्रभु श्रीराम का भजन करते रहते थे। हनुमान जी को व्यास (विस्तार) विज्ञान का ज्ञान था। हनुमान जी जरूरत पड़ने पर अपने रूप को बड़ा कर लेते थे।

लंका दहन के समय देखा गया कि हनुमान जी की पूंछ काफी विशाल हो गई थी। इसके अलावा उन्होंने लंका में माता सीता को अपने स्वर्ण रूप का दर्शन कराया था। हनुमान जी के पास गजब का विश्वास था। उनका यह विश्वास प्रभु श्रीराम में था। राम जी में विश्वास रखते हुए हनुमान जी ने कई बड़े-बड़े कार्य कर डाले। चाहे विशाल समुद्र को पार करना हो, सीता जी का पता लगाना हो या फिर हिमालय पर्वत से संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण की रक्षा करनी हो, ये सब हनुमान जी के विश्वास विज्ञान की वजह से ही हो सका। हनुमान जी को समास (सूक्ष्म) विज्ञान का भी ज्ञान था।

रामायण में देखा गया कि लंका जाते समय समुद्र पार करने के लिए हनुमान जी ने अति सूक्ष्म रूप धारण कर लिया था। यह सूक्ष्म विज्ञान की जानकारी के बिना नहीं हो सकता। हनुमान जी को 'अतुलित बलधामा' कहा जाता है। जिसमें शील हो वही चरित्रवान है। हनुमानजी का शील ही चरित्र है और चरित्रवान ही वास्तव में बलवान होता है। चरित्रवान में बहुत बल होता है। रावण ने युद्ध में समस्त राक्षसों से कहा कि सबकी निंदा कर लेना, लेकिन हनुमान जी की निंदा मत करना। क्योंकि हनुमान जी शिव का रूप हैं और मेरे गुरु शिव हैं। हनुमान जी जैसी पवित्रता भी किसी में नहीं मिलेगी। गोस्वामी तुलसीदास कहते है कि हनुमान में अर्थ पावित्र्य है। हनुमान जी काम पावित्र्य है। हनुमान जी मोक्ष पावित्र्य हैं। हनुमान जी विनम्र हैं। विनम्रता के आचार्य हैं।
हनुमान जी यज्ञ पुत्र हैं, यज्ञप्रसाद हैं। हनुमान नीति निपुण हैं। हनुमान जी नीति निर्धारक हैं। हनुमान जी का जन्म भी दिव्य है और कर्म भी। जब सुग्रीव उन्हें राम की टोह लेने के लिए उनके पास भेजते हैं तो हनुमान जी ब्राह्मण का वेश धर कर जाते हैं और सबसे पहले राम को प्रणाम करते हैं। यहां मानो हनुमान जी ने संदेश दिया है कि सच्चा ब्राह्मण वही है, जो पूरी दुनिया को प्रणाम करे। श्रेष्ठ मनुष्य दूसरों का आदर करते हैं। जिस तरह अग्नि धुएं को ऊपर रखती है और पर्वत तिनके को ऊपर रखता है, वैसे ही जो श्रेष्ठ होता है, सक्षम होता है, वह सदैव दूसरों को सम्मान देकर अपने से ऊपर ही रखता है।

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યુગક્રાંતિના ઘડવૈયા પં. શ્રીરામ શર્મા આચાર્ય

યુગક્રાંતિના ઘડવૈયા પં. શ્રીરામ શર્મા આચાર્યની કલમે લખાયેલ ક્રાંતિકારી સાહિત્યમાં જીવનના દરેક વિષયને સ્પર્શ કરાયો છે અને ભાવ સંવેદનાને અનુપ્રાણિત કરવાવાળા મહામૂલા સાહિત્યનું સર્જન કરવામાં આવ્યું છે. તેઓ કહેતા “ન અમે અખબારનવીસ છીએ, ન બુક સેલર; ન સિઘ્ધપુરૂષ. અમે તો યુગદ્રષ્ટા છીએ. અમારાં વિચારક્રાંતિબીજ અમારી અંતરની આગ છે. એને વધુમાં વધુ લોકો સુધી ૫હોંચાડો તો તે પૂરા વિશ્વને હલાવી દેશે.”

દરેક આર્ટીકલ વાંચીને તેને યથાશક્તિ–મતિ જીવનમાં ઉતારવા પ્રયત્ન કરશો તથા તો ખરેખર જીવન ધન્ય બની જશે આ૫ના અમૂલ્ય પ્રતિભાવો આપતા રહેશો .

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